Musings

बनाएँगे काग़ज़ की गौरैय्या लेटर पैड के सुंदर काग़ज़ से और हथेलियों में भर तुम्हारे नाम का कोई जादू मंतर, भेज देंगे उनको नीले आसमान में

हम इतनी तन्हाई में जीते हैं कि ऐसी शिकायत भी नहीं कर सकते कि ‘जाना ही था तो आए ही क्यूँ थे’। हम सीखेंगे कम में ख़ुश होना। जितना मिला है उतने में जीना। हम सीखेंगे बिना अलविदा कहे चले गए लोगों के हिस्से की दिल की ज़मीन पर रोपना सुर्ख़ बोगनविला के पौधे…

भले ही प्रेम कितनी भी गहराई से करें…अलविदा को आसान करना सीखना बाक़ी रहेगा शायद बहुत बहुत सालों तक भी। हम स्टेप बाई स्टेप सीखेंगे। जैसे कि पहला स्टेप होगा कि सब कुछ इतना ज़्यादा ना दुखे, थोड़ा कम दुखे…बस थोड़ा सा कम।

हम सीखेंगे साँस लेना…कुछ ऐसे साँस लेना कि सीने के बीच कुछ ना चुभे। ख़ास तौर से कविताएँ, किसी की हँसी, कोई अबोला, किसी शहर की धूप…कुछ भी ना चुभे साँस की रफ़्तार में। आसान हो साँस लेना।

लिखे में, पढ़े में, जिए में से उनकी छेकी हुयी जगह ख़ाली करना। थोड़ा थोड़ा कर के। मिटाएँगे किताबों के हाशिए पर लिखे उनके नाम ख़त। बनाएँगे काग़ज़ की गौरैय्या लेटर पैड के सुंदर काग़ज़ से और हथेलियों में भर तुम्हारे नाम का कोई जादू मंतर, भेज देंगे उनको नीले आसमान में।

हम जितनी आसानी से करते हैं प्रेम…काश उतनी ही आसानी से बिसार भी सकते तुम्हें। तुम्हारी हँसी को। तुम्हारे शहर के मौसम को। तुम्हारी आवाज़ को। तुम्हारे गले लग कर अपने हिस्से लिखा लाए बहुत से सुख को।

हम सीखेंगे ख़ुद को माफ़ करना…इतने ज़्यादा प्रेम के लिए। कि हमारा कोई दोष नहीं है। हमारे हिस्से कुछ ज़्यादा लोग होते तो शायद हर एक के हिस्से थोड़ा कम कम प्यार आता। इतने कम लोग हैं कि सबके हिस्से दिल भर भर आने तक प्यार आता है।

जब अतीत में हम ज़्यादा लौटते हैं तो इसका मतलब हम अपने वर्तमान में नहीं होना चाहते। तो हम शुरू करेंगे एक ऐसा वर्तमान बनाना जिसके रंग ख़ुश हों। जिसका आसमान अपना हो। जिसमें रहने वाले लोगों को कुछ भी आए या नहीं आए, अलविदा कहना ज़रूर आए। लेकिन अगर इतना ना हो सके तो हमें थोड़ा सा अपने दिल को दुखना कम करना आ जाए, बस।

तुम्हें जिस रोज़ पूरी तरह भूल जाएँगे, उस दिन बहुत दुखेगा। हमको याद नहीं किसी को बहुत सालों में भी इतना और बिना कुछ चाहे, माँगे, या डरे हुए, बेमतलब ही प्यार किए थे, बेतरह। तुमसे अपनी बेगुनाही में प्यार किया था। अपने किसी किरदार की तरह। अपनी ईमानदारी में। बिना समझे या समझने की कोशिश किए हुए।

हम तो ये भी नहीं माँगते हैं कि हमको बताओ कि तुम गए क्यूँ हो…लेकिन इतना कह देना, कि जा रहे हो, और मैं तुम्हारा इंतज़ार ना करूँ। इतना चाहना तो ऐक्सेप्टबल है ना? कुछ नही कह सकते अब भी तुमसे। सिवाए एक ‘शुक्रिया’ के। मेरी ज़िंदगी में होने का शुक्रिया।

बहुत प्यार।

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