Musings, Poetry

कोई नहीं जानता वे कहाँ से आती थीं
सोना बदन और राख दिल वाली औरतें

कविताओं से निष्कासित प्रेमिकाएँ?
डेथ सर्टिफ़िकेट से विलुप्त नाम?
भ्रूण हत्या में निकला माँस का लोथड़ा?
बलात्कार के क्लोज़्ड केस वाली स्त्रियाँ?

उन्हें जहाँ जहाँ से बेदख़ल किया गया
हर उस जगह पर खुरच कर लिखतीं अपना नाम
अपने प्रेमियों की मृत्यु की तिथि
और हत्या करने की वजह

वे अपने मुर्दा घरों की चौखट लाँघ कर आतीं
अंतिम संस्कार के पहले माँगती अंतिम चुम्बन

किसी अपशकुन की तरह चलता उनका क़ाफ़िला
वे अपनी मीठी आवाज़ और साफ़ उच्चारण में पढ़तीं
श्राद्धकर्म के मंत्र। उनके पास होती माफ़ी
दुनिया के सारे बेवफ़ा प्रेमियों के लिए।

वे किसी ईश्वर को नहीं मानतीं।
सजदा करतीं दुनिया के हर कवि का
लय में पुकारतीं मेघ, तूफ़ान और प्रेम को
और नामुमकिन होता उनका आग्रह ठुकराना।

कहते हैं, बहुत साल पहले, दुःख में डूबा
कवि, चिट्ठियों के दावानल से निकला
तो उसकी आँखों में आग बची रह गयी
उस आग से पिघल सकती थी
दुनिया की सारी बेड़ियाँ।

उन्हीं दिनों
वे लिए आती थीं अपना बदन
कवि की आँखों में पिघल कर
सोना बन जाती थीं औरतें
उनके बदन से पैरहन हटाने वाली आँखें
उम्र भर सिर्फ़ अँधेरा पहन पाती थीं।

औरतें
लिए आतीं थीं अपना पत्थर दिल
कवि की धधकती आँखें, उन्हें
लावा और राख में बदल देतीं
उनसे प्रेम करने वाले लोग
बन जाते थे ज्वालामुखी

बढ़ती जा रही है तादाद इन औरतों की
ये ख़तरा हैं भोली भाली औरतों के लिए
कि डरती तो उनसे सरकार भी है
नहीं दे सकती उन्हें बीच बाज़ार फाँसी।

सरकारी ऑर्डर आया है
सारे कवियों को, धोखे से
मुफ़्त की बँट रही मिलावटी दारू में
शुद्ध ज़हर मिला कर
मार दिया जाए।

इस दुनिया में, जीते जी
किसी को कवि की याद नहीं आती।

ना ही उसके बिन बन सकेंगी
सोना बदन और राख दिल वाली औरतें
कि जो दुनिया बदल देतीं।

ये दुनिया जैसी चल रही,
चलती रहनी चाहिए।
तुम भी बच्चियों को सिखाना
कविता पढ़ें, बस
न कि अपना दिल या बदन लेकर
कवि से मिलने चली जाएँ।

औरतों को बताएँ नियम
कवि से प्रेम अपराध है
बनी रहें फूल बदन, काँच दिल
बनी रहें खिलता हुआ हरसिंगार
बनी रहें औरतें। औरतें ही, बस।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s