Musings, Shorts

#अप्रेम

मैं सोचती हूँ तुम्हारे बारे में। अक्सर। बहुत दर्द और नीमबेहोशी की चीख़ों के बीच भी। मैं सोचती हूँ हम क्या हो सकते थे। क्या हम कुछ हो सकते थे एक दूसरे के?

मैं सोचती हूँ कि तुमने कभी सोचा होगा कि तुम्हारी ज़िंदगी में इतने सारे लोग हैं, लेकिन फिर भी मेरी कुछ जगह बना सकते थे तुम। शायद नहीं। तुम व्यस्त हो। अपनी कविताओं। अपने जीवंत रंगों में। अपने श्वेत श्याम में। कभी तुमने अपने धरे हुए कपड़ों में से कोई काली शर्ट निकाली होगी और पहनने के बाद कभी सोचा, कि एक सेल्फ़ी लेकर भेज दें… उस पागल लड़की को?

मैं तुम्हारी अपरिभाषित होना चाहती थी। जिसके बारे में कोई पूछे तो उलझ जाओ। कि नहीं, पता नहीं। उसके जैसा कोई रिश्ता जिया नहीं है मैंने तो कह नहीं सकता। पर वो मेरी कुछ तो है। कभी बारिश हो तो चाय बनाते हुए दुष्यंत का शेर याद आए, ‘तेरी ज़िंदगी में अक्सर, मैं कोई वजह रहा हूँ’। फिर गुनगुनाने लगो, कि तुम्हें आदत है कि कवि होते हुए कविता हुए जाते हो। पूरी ही ग़ज़ल ख़ूबसूरत है…

ये ज़मीन तप रही थी ये मकान तप रहे थे
तेरा इंतज़ार था जो मैं इसी जगह रहा हूँ

तेरे सर पे धूप आई तो दरख़्त बन गया मैं
तेरी ज़िन्दगी में अक्सर मैं कोई वजह रहा हूँ

मैं सोचती रही कि तुम्हारे होने की वजह होनी चाहिए थी। तुम्हारे जाने की वजह होनी चाहिए थी। मैं कम लोगों से जुड़ती हूँ। मैं तुमसे जुड़े रहना चाहती थी। तुम्हारी फ़्रेंडलिस्ट में होना सिर्फ़ इसलिए अच्छा था कि मैं तुम्हारी कुछ तस्वीरें देख सकती थीं। कभी कभी तुम्हारी पुरानी मुस्कुराती हुयी तस्वीरों को देख कर मैंने तुम्हारे सुख की कल्पना की है।

काश कि मेरे पास देने को प्रेम होता तो मैं तुम्हारे हिस्से लिख देती। लेकिन कवि, तुम मेरे जीवन में बहुत देर से आए। अब मेरे पास सिर्फ़ थोड़े से दुःख हैं। कभी कभी बारिश होती है तो बारिश का शोर, कुछ विंडचाइम्ज़ वाली खिड़की, कभी कभार बोगनविला। इतना ही है। लेकिन इसके मोल तुम्हारा क़ीमती वक़्त नहीं मिलता। इनके मोल किसी का भी वक़्त नहीं मिलता।

तुम्हारे जीवन में कितने सारे और कितने ख़ूबसूरत लोग हैं। तुम्हें मेरी कमी महसूस नहीं होगी। मैं मिस करती हूँ तुम्हें। लेकिन तुलसी कह गए हैं, ‘आवत ही हरषै नहीं नैनन नहीं सनेह।तुलसी तहां न जाइये कंचन बरसे मेह’। तो तुम्हारे यहाँ जा के क्या करना।

किसी से यूँ ही नहीं होता मोह। यूँ नहीं दुखता हर किसी का जाना। मैं जिन कुछ लोगों के बारे में सोचती हूँ, उसमें तुम भी हो। व्यस्त होने पर। दुःख में। उदासी में। ख़ुशी में। किसी किताब को पढ़ते हुए।

कितना कुछ होता हमारे बीच, लेकिन, शब्दों के धनी कवि… मेरी बात आते ही तुम्हारा भी जी छोटा हो गया… एक ही शब्द लिखा हमारे हिस्से…

काश!

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