Poetry

Forgettable

The sea in my dreams
Smells of your sweat soaked shirt I buried myself into
That lazy summer afternoon
Spent doing nothing.

Our feet up on the wall
Jazz playing on the phone
Your fingers running through my hair
Giggles. Kisses. Daze.
Silence between two songs.

The sea in my dreams
Still waits for sundown
To make love.

I don’t want to write poetry
Give me your bare back
To dig my nails into
Lest you forget me too soon.

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Musings, Poetry

कविता पढ़ते हुए
उसके काग़ज़ी होंठ
नहीं मैच करते उसकी आवाज़ से।

थिर हो पढ़ता है कविता
आवाज़ रह जाती है
सुनने वाले की चुप्पी में आजीवन।

जी उठते हैं उसके होंठ
चूमने की हड़बड़ाहट में
छिनी जा रही होती है उम्र।

नहीं पड़ते हैं निशान
कि लौटानी भी तो होती है
उधार पर लायी प्रेमिका।

उसके प्रेम में उलझी स्त्रियों की
नश्वर देह में भी जीता है
उसका कालजयी कवि मन।

वो कविता पढ़ते हुए
कुछ और होता है
चूमते हुए कुछ और।

***

***
जाते हुए वह नहीं रुकता
शब्दों से, कविता से, या किताबों से ही
वो रुकता है सिर्फ़ देह पर।

इसलिए पिछली बार उसके जाते हुए
मैंने उसे लंघी मार दी
वो देहरी पर ऐसा गिरा कि कपार फूट गया
और कई कविताएँ बह गयीं टप टप उसके माथे से बाहर।

उस बार वह कई दिन रुका रहा था
शाम की सब्ज़ी, सुबह की चाय, और
दुनिया के सबसे अच्छे कवि कौन हैं
पर बक-झक करते हुए।

Musings, Poetry

जिस स्त्री के पास
कुछ भी नहीं था
कवि को देने के लिए
उसी मीठी स्त्री की रसोई में
एक हाथ की दूरी पर था
चीनी का डिब्बा
उसने तीन तार की चाशनी बनायी
और पाग कर रखे कई सारे
‘विदा’

तब से, कवि की आँख में नमक था
फिर भी उसकी सारी कविताएँ
मीठी थीं।

***

मेरे पास शब्द कभी नहीं थे
लेकिन जब तुम चले गए दूर
तो मैंने पहली बार सुनी अपनी आवाज़
एक धीमी बुदबुदाहट वाली रूलाई में लिपटी हुयी
‘मौसम, मौसम, मौसम’।

***

मेरे तुम्हारे बीच
एक मौसम इंतज़ार करता है
कि हम उगा सकें कोई साझा शहर
साझी गली, साझी छत एक
और वो हमें बाँहों में भर ले
पूरा का पूरा
कि याद आए उसे अपना नाम भी
‘बारिश’

***

और ये फिर भी ठीक होता
आहिस्ता आहिस्ता दूर होना
एक दूसरे से
अगर हम दुःख से थके हुए होते।

पर हम प्रेम से थके हुए थे।IMG_0028.jpg

 

Musings, Poetry

सोना बदन और राख दिल वाली औरतों का होना

थोड़ा कम मुश्किल है
उसके प्रेम में, भला आदमी बनना
इसलिए, रे बुड़बक लड़के!
प्रेमिका ऐसी चुनना
जो तुम्हें जानवर से इन्सान बना सके।

(लड़कियों को सिखाया जाता है
अविवाहित, जंगली लड़कों को
आँचल के नीचे छुपा
पालतू बनाना)

मुझसे मत पूछो
कि उस लड़की का क्या
जिसे भले लड़के नापसंद हैं
जिसे किसी लफुए से शादी करनी है
जो उससे ज़्यादा बिगड़ा हुआ हो
उसपर सच्चरित्र होने का बोझ ना डाले
सती सावित्री नहीं, सैटिस्फ़ायड होना है उसे।

तुम भले लड़के हो
(अरेंज मैरेज करने वाले लड़के
भले होते हैं या मजबूर?)

तुम्हारे लिए बहुत ही मुश्किल है
माँग सकना, उसका बदन
या कि चूमने की इजाज़त ही।

तुमसे होगा?
दोबजिया पैसेंजर ट्रेन लेकर जाना
उस छोटे हॉल्ट पर
जहाँ दिन भर में एक ट्रेन रूकती है।

ब्लैक कुर्ते के तीन बटन खोल कर
गले में डाले हुए लाल चेक गमछा
लू के थपेड़े खाते हुए
इंतज़ार करना, पेड़ के नीचे।

हुमक कर नहीं भरना उसे बाँहों में
चिट्ठी गिराने के बहाने, घर से निकल कर
वो प्रेम और पसीने में लथपथ आए, तो।

नहाना नहर में साथ
देना उसे गमछा, बदन पोंछने के लिए
और लम्बे बालों का जूड़ा लपेटने को।

शायरी नहीं, कामसूत्र रटना
हनीमून के लिए शिमला मनाली नहीं
खजुराहो का प्लान बनाना
गिफ़्ट में देना, पलंगतोड़ पान।

दुनिया में सब भले नहीं होते
तुम, अपने जैसा होना
और चुनना, अपने जैसी ही
जंगली, कटखनी लड़की

प्रेम में शोर की जगह रखना
चीख़ चीख़ के लड़ना
ज़ोर ज़ोर से गाना
और हाँ,
अपने बच्चे की छट्ठी में
हमको पक्के से बुलाना।

Musings, Poetry

कोई नहीं जानता वे कहाँ से आती थीं
सोना बदन और राख दिल वाली औरतें

कविताओं से निष्कासित प्रेमिकाएँ?
डेथ सर्टिफ़िकेट से विलुप्त नाम?
भ्रूण हत्या में निकला माँस का लोथड़ा?
बलात्कार के क्लोज़्ड केस वाली स्त्रियाँ?

उन्हें जहाँ जहाँ से बेदख़ल किया गया
हर उस जगह पर खुरच कर लिखतीं अपना नाम
अपने प्रेमियों की मृत्यु की तिथि
और हत्या करने की वजह

वे अपने मुर्दा घरों की चौखट लाँघ कर आतीं
अंतिम संस्कार के पहले माँगती अंतिम चुम्बन

किसी अपशकुन की तरह चलता उनका क़ाफ़िला
वे अपनी मीठी आवाज़ और साफ़ उच्चारण में पढ़तीं
श्राद्धकर्म के मंत्र। उनके पास होती माफ़ी
दुनिया के सारे बेवफ़ा प्रेमियों के लिए।

वे किसी ईश्वर को नहीं मानतीं।
सजदा करतीं दुनिया के हर कवि का
लय में पुकारतीं मेघ, तूफ़ान और प्रेम को
और नामुमकिन होता उनका आग्रह ठुकराना।

कहते हैं, बहुत साल पहले, दुःख में डूबा
कवि, चिट्ठियों के दावानल से निकला
तो उसकी आँखों में आग बची रह गयी
उस आग से पिघल सकती थी
दुनिया की सारी बेड़ियाँ।

उन्हीं दिनों
वे लिए आती थीं अपना बदन
कवि की आँखों में पिघल कर
सोना बन जाती थीं औरतें
उनके बदन से पैरहन हटाने वाली आँखें
उम्र भर सिर्फ़ अँधेरा पहन पाती थीं।

औरतें
लिए आतीं थीं अपना पत्थर दिल
कवि की धधकती आँखें, उन्हें
लावा और राख में बदल देतीं
उनसे प्रेम करने वाले लोग
बन जाते थे ज्वालामुखी

बढ़ती जा रही है तादाद इन औरतों की
ये ख़तरा हैं भोली भाली औरतों के लिए
कि डरती तो उनसे सरकार भी है
नहीं दे सकती उन्हें बीच बाज़ार फाँसी।

सरकारी ऑर्डर आया है
सारे कवियों को, धोखे से
मुफ़्त की बँट रही मिलावटी दारू में
शुद्ध ज़हर मिला कर
मार दिया जाए।

इस दुनिया में, जीते जी
किसी को कवि की याद नहीं आती।

ना ही उसके बिन बन सकेंगी
सोना बदन और राख दिल वाली औरतें
कि जो दुनिया बदल देतीं।

ये दुनिया जैसी चल रही,
चलती रहनी चाहिए।
तुम भी बच्चियों को सिखाना
कविता पढ़ें, बस
न कि अपना दिल या बदन लेकर
कवि से मिलने चली जाएँ।

औरतों को बताएँ नियम
कवि से प्रेम अपराध है
बनी रहें फूल बदन, काँच दिल
बनी रहें खिलता हुआ हरसिंगार
बनी रहें औरतें। औरतें ही, बस।

Musings, Poetry

जो रंग तुम्हारे हैं, मेरे पास रहने दो…

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सब कुछ बीत जाने के बाद
सिर्फ़ एक रंग में बचा रह जाता है प्रेम

तुम बिसर गए हो
मौसम अब ऊँगली थाम कर
नहीं ले जाते तुम्हारे शहर

कोई अच्छी कविता
पढ़ लेती हूँ अकेली
और दुखता नहीं

फ़िल्में, गाने, किताबें
कुछ भी तुमसे साझा करने को
अब हूक नहीं उठती

ज़िंदगी में बहुत रंग हैं
और हर रंग के हज़ार क़िस्से
लेकिन नीला
हमेशा उस शर्ट का रंग रहेगा
जो तुमने आख़िरी मुलाक़ात में पहनी थी।

Poetry

जादूगर, जो खुदा है, रकीब़ भी और महबूब भी

वे तुम्हारे आने के दिन नहीं थे. मौसम उदास, फीका, बेरंग था. शाम को आसमान में बमुश्किल दो तीन रंग होते थे. हवा में वीतराग घुला था. चाय में चीनी कम होती थी. जिन्दगी में मिठास भी.
फिर एक शाम अचानक मौसम कातिल हो उठा. मीठी ठंढ और हवा में घुलती अफीम. सिहरन में जरा सा साड़ी का आँचल लहरा रहा था. कांधे पर बाल खोल दिये मैंने. सिगरेट निकाल कर लाइटर जलाया. उसकी लौ में तुम्हारी आँखें नजर आयीं. होठों पर जलते धुयें ने कहा कि तुमने भी अपनी सिगरेट इसी समय जलायी है.
ये वैसी चीज थी जिसे किसी तर्क से समझाया नहीं जा सकता था. जिस दूसरी दुनिया के हम दोनों बाशिंदे हैं वहाँ से आया था कासिद. कान में फुसफुसा कर कह रहा था, जानेमन, तुम्हारे सरकार आने वाले हैं.
‘सरकार’. बस, दिल के खुश रखने को हुज़ूर, वरना तो हमारे दिल पर आपकी तानाशाही चलती है.
खुदा की मेहर है सरकार, कि जो कासिद भेज देता है आपके आने की खबर ले कर. वरना तो क्या खुदा ना खास्ता किसी रोज़ अचानक आपको अपने शहर में देख लिया तो सदमे से मर ही जायेंगे हम.
जब से आपके शहर ने समंदर किनारे डेरा डाला है मेरे शब्दों में नमक घुला रहता है. प्यास भी लगती है तीखी. याद भी नहीं आखिरी बार विस्की कब पी थी मैंने. आजकल सरकार, मुझे नमक पानी से नशा चढ़ रहा है. बालों से रेत गिरती है. नींद में गूंजता है शंखनाद.
दूर जा रही हूँ. धरती के दूसरे छोर पर. वहाँ से याद भी करूंगी आपको तो मेरा जिद्दी और आलसी कासिद आप तक कोई खत ले कर नहीं जायेगा.
जाने कैसा है आपसे मिलना सरकार. हर अलविदा में आखिर अलविदा का स्वाद आता है. ये कैसा इंतज़ार है. कैसी टीस. गुरूर टूट गया है इस बार सारा का सारा. मिट्टी हुआ है पूरा वजूद. जरा सा कोई कुम्हार हाथ लगा दे. चाक पे धर दे कलेजा और आप के लिये इक प्याला बना दे. जला दे आग में. कि रूह को करार आये.
किसी अनजान भाषा का गीत
रूह की पोर पोर से फूटता
तुम्हारा प्रेम
नि:शब्द.
 
–//–
वो
तुम्हारी आवाज़ में डुबोती अपनी रूह 
और पूरे शहर की सड़कों को रंगती रहती 
तुम्हारे नाम से
–//–
 
तर्क से परे सिर्फ दो चीज़ें हैं. प्रेम और कला. 
जिस बिंदु पर ये मिलते हैं, वो वहाँ मिला था मुझे. 
मुझे मालूम नहीं कि. क्यों.
–//–
उसने जाना कि प्रेम की गवाही सिर्फ़ हृदय देता है। वो भी प्रेमी का हृदय नहीं। उसका स्वयं का हृदय।
वह इसी दुःख से भरी भरी रहती थी।
इस बार उसने नहीं पूछा प्रेम के बारे में। क्यूंकि उसके अंदर एक बारामासी नदी जन्म ले चुकी थी। इस नदी का नाम प्रेम था। इसका उद्गम उसकी आत्मा थी।
–//–
उसने कभी समंदर चखा नहीं था मगर जब भी उसकी भीगी, खारी आँखें चूमता उसके होठों पर बहुत सा नमक रह जाता और उसे लगता कि वो समंदर में डूब रहा है।
–//–
तुम जानती हो, उसके बालों से नदी की ख़ुशबू आती थी। एक नदी जो भरे भरे काले बादलों के बीच बहती हो।
–//–
तुम मेरी मुकम्मल प्यास हो.
–//–
नमक की फितरत है कच्चे रंग को पक्का कर देता है. रंगरेज़ ने रंगी है चूनर…गहरे लाल रंग में…उसकी हौद में अभी पक्का हो रहा है मेरी चूनर का रंग…
और यूं ही आँखों के नमक में पक्का हो रहा है मेरा कच्चा इश्क़ रंग…
फिर न पूछना आँसुओं का सबब.
–//–
प्यास की स्याही से लिखना
उदास मन के कोरे खत
और भेज देना 
उस एक जादूगर के पास
जिसके पास हुनर है उन्हें पढ़ने का
जो खुदा है, रकीब़ भी और महबूब भी
–//–
वो मर कर मेरे अन्दर
अपनी आखिर नींद में सोया है
मैं अपने इश्वर की समाधि हूँ.
***
—-
***
मैं तुम्हारे नाम रातें लिख देना चाहती हूँ 
ठंडी और सीले एकांत की रातें 
नमक पानी की चिपचिपाहट लिए 
बदन को छूने की जुगुप्सा से भरी रातें 
ये मेरे मर जाने के दिन हैं मेरे दोस्त 
मैं खोयी हूँ ‘चीड़ों पर चाँदनी में’ 
और तुम बने हुए हो साथ
–/
मैं तुम्हारे नाम ज़ख़्म लिख देना चाहती हूँ
मेरे मर जाने के बाद…
तुम इन वाहियात कविताओं पर 
अपना दावा कर देना
तुमसे कोई नहीं छीन सकेगा 
मेरी मृत्यु शैय्या पर पड़ी चादर 
तुम उसमें सिमटे हुए लिखना मुझे ख़त 
मेरी क़ब्र के पते पर
वहाँ कोई मनाहट नहीं होगी 
वहाँ सारे ख़तों पर रिसीव्ड की मुहर लगाने 
बैठा होगा एक रहमदिल शैतान 
—/
मुझे कुछ दिन की मुक्ति मिली है 
मुझे कुछ लम्हे को तुम मिले हो
उम्र भर का हासिल
बस इतना ही है.